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Indian Statistical Institute (भारतीय सांख्यिकी संस्थान )

भारतीय सांख्यिकी संस्थान  भारतीय सांख्यिकी संस्थान  गूंजे प्रतिपल तव जयति गान  जिससे पुष्पित और पोषित हैं  सांख्यिकी गणित व विविध ज्ञान || भारतीय सांख्यिकी संस्थान गूंजे प्रतिपल तव जयति गान ||1|| श्री महालनोबिस की बंग धरा  संस्थान हेतु जो गया वरा  यह रामकृष्ण की पुण्य धरा  आध्यात्म से जिसने पीर हरा  राजा और विद्यासागर ने  जिस भू पे चेतना भाव भरा  इस धरा से ही सम्बद्ध रहे  आचार्य और कविगुरु महान || भारतीय सांख्यिकी संस्थान गूंजे प्रतिपल तव जयति गान||2|| दिल्ली बेंगलुरु केंद्र सहित    चेन्नई तेजपुर तक प्रसरित भिन्नता में एकल भाव निहित अनुशीलन नवाचार हो नित  जो करे मनुजता को विकसित  बहु विषयक नित नूतन प्रयोग  उत्कृष्ट ध्येय भारत का हित शत कोटि वर्ष तव कीर्ति गान || भारतीय सांख्यिकी संस्थान गूंजे प्रतिपल तव जयति गान ||3|| © अमित तिवारी (हिंदी दिवस (14 सितम्बर 2022) के अवसर पर भारतीय सांख्यिकी संस्थान बेंगलुरु में काव्यपाठ के लिए विरचित)  English Translation Indian Statistical Institute Indian Statistical Institute May your hymn of praise resound at all times which blossoms and cares Mathem

Bengaluru "Least Liveable" ?

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I remember ARD sir (Former Professor at DRTC, Indian Statistical Institute) talking about the state of research and development. He used to say most of the research is politically motivated and intends to harm or loot the people. A fraction of research is indeed for welfare. Indexes are no exception. Many so-called global indexes are either following the path of majority of the research or critically lacking in their methodology. In the present context, The Global Liveability Index's generalisation seems flawed. The index ranks 172 global cities based on five parameters(weightage in %): Stability(25%), Healthcare(20%), Culture & Environment(25%), Education(10%), and Infrastructure(20%). There are many questions about the methodology of this index. The first question is what is the basis of the weightage for each parameter.  Ranking requires a benchmark, and the claim of ranking highly relative aspects such as culture seems far-fetched. A culture encompasses language, religion,

फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन/स्पीच (Freedom of Expression/Speech)

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शशि थरूर और महुआ मोइत्रा विपक्ष की प्रखर आवाज हैं। अधिकांश मुद्दों पर उनके विचार प्रगतिवादी होते  हैं, परंतु काली फिल्म के संदर्भ में उनकी राय उचित नहीं प्रतीत होती। विभिन्न संस्कृतियों में काली के भिन्न भिन्न रूपों की उपासना निर्विवाद है, काली के मांसाहार और मद्यपान के रूप की कल्पना भी संभव है। किंतु काली को माता मानने वाले लोग भी तो हैं, एकबार उनके बारे में भी सोच लीजिए। आस्था और मनोरंजन दो भिन्न विषय हैं। आस्था और मनोरंजन अथवा फ्रीडम ऑफ स्पीच के मध्य में एक लकीर का होना आवश्यक है। आपकी फ्रीडम ऑफ स्पीच यदि अनेक लोगों को कष्ट पहुंचाकर  संतृप्त होती है तो आप सेडिस्ट (sadist) हैं। लोगों के काली के प्रति विरोध को एक और उदाहरण से समझते हैं, वर्ष 1983 में आई एक फिल्म (किसी से मत कहना, निर्देशक: ऋषिकेश मुखर्जी) जिसमें पटकथा की रोचकता के लिए हनीमून होटल को हनुमान होटल बना दिया गया था। वर्ष 2018 में उसी दृश्य का उद्धरण लेकर ऑल्ट न्यूज़ के पत्रकार जुबैर ने मोदी से पहले के प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल को हनीमून और मोदी के कार्यकाल को हनुमान बताते हुए ट्वीट कर दिया। भारत के अनेक बहुसंख्यकों को ये

A Casual Visit

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Recently, on June 4th 2022, I got a chance to visit my friend Anand Kumar Singh at his home, which is located in Singhpur village of Payagpur Tashsil, District Baharaich. We had planned to meet in Delhi, his temporary address, when he was preparing for the UPSC civil services exam. But since in the recent development he got Rank 206 in UPSC 2021 and secured the position for IAS, also he was very much demanded by his natives consequently he had to return to his home at Baharaich, and as pre-planned, I went to meet him at his home. My home is at Malikpur Nonara Village of Kadipur Tahsil, District Sultanpur. Even though We both belong to the Awadh region of Uttar Pradesh, it is not so easy to travel to each other's homes using public transport. Our houses are around 200 Kms far from each other, but it took about 7-8 hours for me to reach his home this time. I visited Akbarpur (Ambedkarnagar) on my bike, and then I got a bus for Ayodhya, followed by a bus from Ayodhya to Gonda and a bu

जोगीरा सा रा रा रा रा

जोगीरा सा रा रा रा रा, जोगीरा सा रा रा रा रा जोगीरा सा रा रा रा रा, जोगीरा सा रा रा रा रा।। 1 ।।  तीस मिनट का रूल लगाके, गए सी आर ई भूल।  बच्चे अपने दांत पीस रहे, निकलेंगे अब हूल।। 2।।  जोगीरा सा रा रा रा रा।।  एडमिन ऑफिस बैठा रहता, तेल में डाले कान।। रंजीत जाये तो सुन लेंगे, (बाकी) नहीं किसी का मान।। 3।।  जोगीरा सा रा रा रा रा।।  आई एस आई के वर्कर सारे, लेज़ी और एलिगेंट।  काम छोड़ के कुछ हो करना, रेडी परमानेंट।। 4।। जोगीरा सा रा रा रा रा।। इलेक्ट्रीशियन कृष्णमूर्ति, नेवर कॉल ऑन फ़ोन।  बल्ब बदलने को भी बोलो, (तो) सुन लो लॉ ऑफ़ ओम।। 5।। जोगीरा सा रा रा रा रा।। अबकी वाले वार्डन साहब, मैथमेटिक्स में मस्त। कोशिश तो वो पूरा कर रहे, एडमिन से हैं पस्त।। 6।। जोगीरा सा रा रा रा रा।। आई एस आई सिक्योरिटी वाले, पकड़ न पाएं चोर।  स्टूडेंट्स गर गेट पे मिल जाये, (लगता) सिर वो देंगे फोड़।। 7।।  जोगीरा सा रा रा रा रा।। अपने वाले डीन महोदय, निरीक्षक ऑफ़ मास्क।  काम काज सब छोड़ लगे है, यही है उनका टास्क।। 8।। जोगीरा सा रा रा रा रा।। आई एस आई तो भुगत रहा है, कितने ही अभिशाप। एक्वागार्ड भी एक चरस है, बना और स्टॉप।

(कश्मीर की कहानी: आतंकवाद की प्रयोगशाला का जन्म और विकास): समीक्षा

लेखक कमलाकांत त्रिपाठी के ' कश्मीर की कहानी: आतंकवाद की प्रयोगशाला का जन्म और विकास ' वर्तमान के परिपेक्ष्य में बहुत रिलेवेंट है । इस लेख सीरीज में लेखक ने जम्मू कश्मीर के इतिहास, भूगोल, राजनीति, समाज, अर्थतंत्र, धर्म, मनोविज्ञान आदि का जो दार्शनिक प्रस्तुतीकरण किया है वह अप्रतिम है। प्रत्येक सर्ग में लेखक की पक्षपातविहीन टिप्पणी सन्दर्भ के विभिन्न पहलुओं की ओर इंगित करती है। जम्मू-कश्मीर के विलय तथा अन्य घटनाक्रम में त्रिपाठी जी ने  नेहरू, जिन्ना, गाँधी, राजा हरी सिंह, शेख अब्दुल्ला आदि तत्कालीन प्रसिध्द नेताओं के रोल की उल्लेखनीय गहराई से विवेचना की है। साथ ही साथ इस लेख में अनेक ऐसे अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों का वर्णन आया है जिनका अन्य सम्बंधित सन्दर्भों में बहुत कम उल्लेख आया है । लेख के अंत के कुछ सर्गों में लेखक के दार्शनिक पक्ष का विशेष दर्शन प्राप्त होता है। उन्होंने बड़े नेताओं की हिपोक्रेसी और स्ट्रेटेजिक फेलियर का उल्लेख बड़ी साफगोई से किया है। इसके अतिरिक्त इस लेख में अमेरिका और रूस की रस्साकसी, पाकिस्तान की राजनीति और धर्म के अन्तर्सम्बन्ध के ट्रेंड और विकास, अनेक आत

Monolithic Hypocrisy (अखंड पाखंड) (13/08/2021)

Our India is peculiar; lately, Neeraj Chopra earned a gold medal in the javelin throw game, and now the Indian government has opened its mint; what an irony, in the preparation stage, he was not even getting the balanced diet that is required for a javelin thrower (his coach Uwe Hohn once confirmed). The players put a lot of effort into bringing themselves on the podium; it is tough to even launch into the Olympics with limited resources and assistance. This strange mentality of Indian governments is not limited to a particular realm. It is extended to research, training, education, and other areas as well. First, they expect you to perform the best with scarce funds and your talent, and then they would assist you or offer the reward. Time is crucial in competition; if the resources are made available on time, the medal tally will be in the current multiples. Even if some of the states are doing well, others are not adopting their models and continue to believe that the athletes, re

गंवई पंचाइत

एक बार फिनौ पंचाइत के, पुरवा के लोग इकट्ठा बा  बियहा एकड़ के बात नाइ, दावन पे एक एक लाट्ठा बा  आबादी चक तो सुलटि जाय, पर मसला यहिं के पट्टा बा ।।  यहि पुरवा के कुलि प्राणिन के, एक दूसरे से मन खट्टा बा  केउ सुनत नाइ सब खोलि रहे, दुसरे के कच्चा चिट्ठा बा ।।  कानूनगो अउ लेखपाल, समझाई भयेन अरु गयें हारि भागेन दुइनौ जन घर अपने, मसला परधान के तरे डारि ।।  परधान और कुछ पंच लगे, तब सुनइ कुलिन के कान पारि कउनो के मसला घर दुआर, कउनो के झंझट अहइ सारि केउ कहे की वो बेईमान हैन, ऊ कहै वो हमका देहें मारि ।।  पुरवा के कटका धिंगरी से, परधानौ तब ई गयेन समझि  परधान और पंचाइत से, इ बात कबहुँ पाए ना सुलझि पद बोले से सब मनिहैं न, अउ मसला जाये और उलझि ।।  एकर दुइयै पैराया बा, या तो आपस में लेईं बूझि  नाहित दौरें तहसीली में, अउ कगजेन से सब लेइँ जूझि ।।  © अमित तिवारी (ये रचना 9 जुलाई 2021 को लिखी गयी। कल 8 जुलाई 2021 को गांव की ही एक पंचायत में जाने का मौका मिला, ये कविता उसी घटनाक्रम का कलमबद्ध रूपांतरण है। आज भी गाँवों में पंचायते होती हैं लेकिंन अधिकांश में परिस्थितियां उपरिलिखित पंक्तियों जैसी ही होती हैं

Bihar Verdict: Implications (18 November 2015)

After five stages of voting and results, the Bihar election is now over. Grand alliance has got a pure mandate. Bihar results have led us to think about several phenomena of Bihar. Bihar is the third largest populated state with the maximum density. If we categorize the population of Bihar on the basis of caste, we find it is OBC mandated state. Here the population share of the general category is 16%, OBC 51%, Dalits 16% and Muslim 6%. literacy rate of Bihar is 63 % which is less than the national average (i.e., 75%). The election started with the agenda of development however, with the time it came on the religion and finished at the caste. Regarding the Polls, religion became an agenda when AIMIM decided to contest. Dadari was another issue that played a vital role in initial poll polarization. in the end, caste played as the result deciding factor. Caste issue initiated with the statement of Mohan Bhagwat who is the sarsanghchalak of RSS. Although he said only to introspect the res

Economics of Diwali (12 November 2015)

Diwali is one of the most celebrated festivals in India. Diwali, as its name, is the festival of lights. Lights used in Diwali mostly made in the cottage and small industries. The diya makers, the candle makers and small light makers in cities get employment from this festivity. In the market, these small ventures get major of their revenue during this festival. Both in cities and villages, the demand for handmade products ( idol and diya) increases in multiple ratios.  Due to this demand economic factors employment and income increase so that in short term the community like Kumbhar, Murtikar, Candlemakers, etc. get their employment. This is just about the lights other ventures also get benefited during Diwali. Decoration has a distinct role in Diwali. Under decoration sanitation, the coloring of the wall, decoration by flower and rangoli making, etc. are included. All of these have their socio-economic implications. The market of colors, broom, flowers and other decoration products g