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जोगीरा सा रा रा रा रा

जोगीरा सा रा रा रा रा, जोगीरा सा रा रा रा रा जोगीरा सा रा रा रा रा, जोगीरा सा रा रा रा रा।। 1 ।।  तीस मिनट का रूल लगाके, गए सी आर ई भूल।  बच्चे अपने दांत पीस रहे, निकलेंगे अब हूल।। 2।।  जोगीरा सा रा रा रा रा।।  एडमिन ऑफिस बैठा रहता, तेल में डाले कान।। रंजीत जाये तो सुन लेंगे, (बाकी) नहीं किसी का मान।। 3।।  जोगीरा सा रा रा रा रा।।  आई एस आई के वर्कर सारे, लेज़ी और एलिगेंट।  काम छोड़ के कुछ हो करना, रेडी परमानेंट।। 4।। जोगीरा सा रा रा रा रा।। इलेक्ट्रीशियन कृष्णमूर्ति, नेवर कॉल ऑन फ़ोन।  बल्ब बदलने को भी बोलो, (तो) सुन लो लॉ ऑफ़ ओम।। 5।। जोगीरा सा रा रा रा रा।। अबकी वाले वार्डन साहब, मैथमेटिक्स में मस्त। कोशिश तो वो पूरा कर रहे, एडमिन से हैं पस्त।। 6।। जोगीरा सा रा रा रा रा।। आई एस आई सिक्योरिटी वाले, पकड़ न पाएं चोर।  स्टूडेंट्स गर गेट पे मिल जाये, (लगता) सिर वो देंगे फोड़।। 7।।  जोगीरा सा रा रा रा रा।। अपने वाले डीन महोदय, निरीक्षक ऑफ़ मास्क।  काम काज सब छोड़ लगे है, यही है उनका टास्क।। 8।। जोगीरा सा रा रा रा रा।। आई एस आई तो भुगत रहा है, कितने ही अभिशाप। एक्वागार्ड भी एक चरस है, बना और स्टॉप।

(कश्मीर की कहानी: आतंकवाद की प्रयोगशाला का जन्म और विकास): समीक्षा

लेखक कमलाकांत त्रिपाठी के ' कश्मीर की कहानी: आतंकवाद की प्रयोगशाला का जन्म और विकास ' वर्तमान के परिपेक्ष्य में बहुत रिलेवेंट है । इस लेख सीरीज में लेखक ने जम्मू कश्मीर के इतिहास, भूगोल, राजनीति, समाज, अर्थतंत्र, धर्म, मनोविज्ञान आदि का जो दार्शनिक प्रस्तुतीकरण किया है वह अप्रतिम है। प्रत्येक सर्ग में लेखक की पक्षपातविहीन टिप्पणी सन्दर्भ के विभिन्न पहलुओं की ओर इंगित करती है। जम्मू-कश्मीर के विलय तथा अन्य घटनाक्रम में त्रिपाठी जी ने  नेहरू, जिन्ना, गाँधी, राजा हरी सिंह, शेख अब्दुल्ला आदि तत्कालीन प्रसिध्द नेताओं के रोल की उल्लेखनीय गहराई से विवेचना की है। साथ ही साथ इस लेख में अनेक ऐसे अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों का वर्णन आया है जिनका अन्य सम्बंधित सन्दर्भों में बहुत कम उल्लेख आया है । लेख के अंत के कुछ सर्गों में लेखक के दार्शनिक पक्ष का विशेष दर्शन प्राप्त होता है। उन्होंने बड़े नेताओं की हिपोक्रेसी और स्ट्रेटेजिक फेलियर का उल्लेख बड़ी साफगोई से किया है। इसके अतिरिक्त इस लेख में अमेरिका और रूस की रस्साकसी, पाकिस्तान की राजनीति और धर्म के अन्तर्सम्बन्ध के ट्रेंड और विकास, अनेक आत

Monolithic Hypocrisy (अखंड पाखंड) (13/08/2021)

Our India is peculiar; lately, Neeraj Chopra earned a gold medal in the javelin throw game, and now the Indian government has opened its mint; what an irony, in the preparation stage, he was not even getting the balanced diet that is required for a javelin thrower (his coach Uwe Hohn once confirmed). The players put a lot of effort into bringing themselves on the podium; it is tough to even launch into the Olympics with limited resources and assistance. This strange mentality of Indian governments is not limited to a particular realm. It is extended to research, training, education, and other areas as well. First, they expect you to perform the best with scarce funds and your talent, and then they would assist you or offer the reward. Time is crucial in competition; if the resources are made available on time, the medal tally will be in the current multiples. Even if some of the states are doing well, others are not adopting their models and continue to believe that the athletes, re

गंवई पंचाइत

एक बार फिनौ पंचाइत के, पुरवा के लोग इकट्ठा बा  बियहा एकड़ के बात नाइ, दावन पे एक एक लाट्ठा बा  आबादी चक तो सुलटि जाय, पर मसला यहिं के पट्टा बा ।।  यहि पुरवा के कुलि प्राणिन के, एक दूसरे से मन खट्टा बा  केउ सुनत नाइ सब खोलि रहे, दुसरे के कच्चा चिट्ठा बा ।।  कानूनगो अउ लेखपाल, समझाई भयेन अरु गयें हारि भागेन दुइनौ जन घर अपने, मसला परधान के तरे डारि ।।  परधान और कुछ पंच लगे, तब सुनइ कुलिन के कान पारि कउनो के मसला घर दुआर, कउनो के झंझट अहइ सारि केउ कहे की वो बेईमान हैन, ऊ कहै वो हमका देहें मारि ।।  पुरवा के कटका धिंगरी से, परधानौ तब ई गयेन समझि  परधान और पंचाइत से, इ बात कबहुँ पाए ना सुलझि पद बोले से सब मनिहैं न, अउ मसला जाये और उलझि ।।  एकर दुइयै पैराया बा, या तो आपस में लेईं बूझि  नाहित दौरें तहसीली में, अउ कगजेन से सब लेइँ जूझि ।।  © अमित तिवारी (ये रचना 9 जुलाई 2021 को लिखी गयी। कल 8 जुलाई 2021 को गांव की ही एक पंचायत में जाने का मौका मिला, ये कविता उसी घटनाक्रम का कलमबद्ध रूपांतरण है। आज भी गाँवों में पंचायते होती हैं लेकिंन अधिकांश में परिस्थितियां उपरिलिखित पंक्तियों जैसी ही होती हैं

Bihar Verdict: Implications (18 November 2015)

After five stages of voting and results, the Bihar election is now over. Grand alliance has got a pure mandate. Bihar results have led us to think about several phenomena of Bihar. Bihar is the third largest populated state with the maximum density. If we categorize the population of Bihar on the basis of caste, we find it is OBC mandated state. Here the population share of the general category is 16%, OBC 51%, Dalits 16% and Muslim 6%. literacy rate of Bihar is 63 % which is less than the national average (i.e., 75%). The election started with the agenda of development however, with the time it came on the religion and finished at the caste. Regarding the Polls, religion became an agenda when AIMIM decided to contest. Dadari was another issue that played a vital role in initial poll polarization. in the end, caste played as the result deciding factor. Caste issue initiated with the statement of Mohan Bhagwat who is the sarsanghchalak of RSS. Although he said only to introspect the res

Economics of Diwali (12 November 2015)

Diwali is one of the most celebrated festivals in India. Diwali, as its name, is the festival of lights. Lights used in Diwali mostly made in the cottage and small industries. The diya makers, the candle makers and small light makers in cities get employment from this festivity. In the market, these small ventures get major of their revenue during this festival. Both in cities and villages, the demand for handmade products ( idol and diya) increases in multiple ratios.  Due to this demand economic factors employment and income increase so that in short term the community like Kumbhar, Murtikar, Candlemakers, etc. get their employment. This is just about the lights other ventures also get benefited during Diwali. Decoration has a distinct role in Diwali. Under decoration sanitation, the coloring of the wall, decoration by flower and rangoli making, etc. are included. All of these have their socio-economic implications. The market of colors, broom, flowers and other decoration products g

Odd Even Formula: A Case of Delhi (26 December 2015)

Delhi government is prone to implement a new rule regarding sustainable development named the odd-even formula. It is the first initiative of its kind in India. AAP leader Arvind Kejriwal is at the centre of this issue. AAP government has decided that according to dates the travel on vehicles will be allowed. On odd days only those vehicles will be allowed those who have odd vehicle numbers and vice versa. This initiative is in concern of Climate Change and sustainable development. Sustainable development is defined as the process of development which does not affect the capability of development of the future generation. In Indian cities, especially in metro cities, the number of vehicles is increasing day by day. These vehicles are not only polluting the environment but also creating sound pollution. Earlier in 1992, Rio Earth summit first-time world realised the importance of Climate Change and sustainable development. although in the meet nations agreed to follow the protocols that